जानिए बिहार राज्य के बोधगया शहर के ऐतिहासिक पर्यटक स्थल – Know the Historical Tourist Places of Bodh Gaya in the State of Bihar?

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  • बोधगया शहर बिहार में सीट है और यह काफी प्रसिद्ध ऐतिहासिक शहर है, और यह शहर महाबोधि के नाम से भी जाना जाता है बोधगया पूरे भारत में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है, क्योंकि बोधगया को लेकर लोगों के मन में तरह-तरह की धारणाएं भी हैं और आपने सुना ही होगा कि बोधगया शहर में लोग अपने पूर्वजों के पिंड दान भी करते हैं या फिर जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसके पश्चात बोधगया शहर में पिंड दान किए जाते हैं पिंड दान इसलिए किए जाते हैं, ताकि किसी व्यक्ति की आत्मा ना भटके बोधगया शहर में घूमने के लिए बौद्ध धर्म तथा इसके अतिरिक्त सभी धर्मों के लोग यहां पर आते हैं
  • खास तौर पर हिंदू धर्म के लोगों के लिए तो यह एक बहुत ही बड़ा तीर्थस्थल भी है। इतना ही नहीं जो हिंदू भारत के अतिरिक्त अन्य देशों में रह रहे हैं वह भी बोधगया जरूर आते हैं। बौद्ध साहित्य के हिसाब से गौतम बुद्ध फल्गु नदी के किनारे पर आए थे और बोधि वृक्ष के नीचे उन्होंने साधना की थी बोधगया ही वह स्थान है, जहां पर भगवान बुद्ध ने अपने ज्ञान की खोज को समाप्त किया था और उन्हें अपने सभी प्रश्नों के उत्तर भी मिल गए थे बोधगया का उल्लेख इतिहास के पन्नों में भी मिलता है, आज भी यहां पर बहुत से ऐसे प्राचीन मंदिर स्थित हैं जिनके बारे में हम आपको आगे जानकारी देंगे। आज इस पोस्ट के माध्यम से हम यही जानेंगे कि Places To Visit In Bodh Gaya तथा Bodh Gaya Tourist Places और इसी के साथ साथ हम Visiting Places In Bodh Gaya के बारे में भी जानेंगे।

Visiting Places In Bodh Gaya – बोधगया शहर के पर्यटक स्थल?

1. महाबोधि मंदिर ( Mahabodhi Temple )

  • महाबोधि मंदिर बहुत ही पवित्र धार्मिक स्थल है क्योंकि यही वह स्थान है, जहां पर गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और यहां पर पश्चिमी हिस्से में पवित्र बोधि वृक्ष भी स्थित है जिस पेड़ के नीचे बैठकर गौतम बुद्ध ने तपस्या की थी। यहां पर आकर आपको द्रविड़ वास्तुकला शैली की भी इज्जत दिखती है तथा इस महाबोधि मंदिर के संस्थापक हिंदू राजा अशोक सम्राट को माना जाता है। महाबोधि मंदिर भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है जो की पूरी तरह से बना है और आज भी यह बिल्कुल वैसा ही खड़ा है, जैसा कि पहले बनवाया गया था महाबोधि मंदिर लगभग 55 मीटर ऊंचा है।
  • इसकी मरम्मत फिर से 19वीं शताब्दी के दौरान करवाई गई थी  महाबोधि मंदिर के चारों तरफ से पत्थरों से बनी 2 मीटर ऊंची चारदीवारी भी बनी हुई है, और उन चार दिवारी पर कुछ पर तो कमल बने हुए हैं तथा कुछ पर सूर्यालक्ष्मी तथा अन्य हिंदू देवी देवताओं की आकृतियां बनी हुई है इस मंदिर के प्रति लोगों के मन में बड़ी श्रद्धा भाव है। इसीलिए इस मंदिर को देखने के लिए भारत के कोने कोने में से प्रतिदिन 500 से भी अधिक लोग आते हैं। इस मंदिर में आकर आपको इतिहास के बारे में जानने का मौका मिलता है और खास तौर पर जो लोग महात्मा बुध से जुड़े हुए हैं वह तो यहां पर आकर काफी आनंद महसूस करते हैं, अगर आप बिहार राज्य के Bodh Gaya Tourist Places पर घूमने का विचार बना रहे हैं, तो सबसे पहले आप इसी के दर्शन कर सकते हैं।

2. बराबर की पहाड़ियों की गुफाएं ( Caves of Equal Hills )

  • यश थानवी बोधगया शहर में ही स्थित है बराबर की पहाड़ियों में चार गुफाएं स्थित हैं और यह गुफाएं लोमस ऋषि की बताई जाती हैं, और इन गुफाओं के सामने के बाद का आकार एक चौक के आकार के जैसा है इसमें लकड़ी की वास्तुकला भी देखने को मिलती है, और इन गुफाओं के दरवाजों को हाथियों की कतार से सजाया गया है जो कि सत्तू की तरफ ही जाता है इन गुफाओं को मौर्य शासकों के द्वारा बनवाया गया था।
  • यहां पर एक बहुत बड़ा कक्षा तथा चतुर्भुज आकार का मंडप भी स्थित है। इन गुफाओं को देखने के लिए भी भारत के पर्यटक दूर-दूर के राज्यों से आते हैं यह गुफाएं भी भारत में सबसे प्राचीन गुफाएं हैं। इनकी स्थापना लगभग 245 ईसवी पूर्व की गई थी यहां पर आकर इतिहास से जुड़ी बहुत सी रहस्यमई बातें को जानने का मौका मिलता है और यह स्थान भी Places To Visit In Bodh Gaya में अपना खास महत्व रखता है, इस स्थान पर भी पर्यटक रोजाना मिलने के लिए दूर-दूर से आते हैं।

3. विष्णुपद मंदिर ( Vishnupad Temple )

  • बोधगया हिंदुओं के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है, क्योंकि यह अपने आप में ही बहुत से महत्व रखता है। इसी के साथ-साथ यहां पर विष्णुपद मंदिर भी स्थित हैं और यह भी माना जाता है कि इस मंदिर को भगवान विष्णु के पैरों के निशान के चारों तरफ बनाया गया है और इस मंदिर को चांदी की परत से बने होश में केंद्र में भी स्थापित किया गया है। यह मंदिर भी लगभग 220 साल पुराना है और यह मंदिर फल्गु नदी के किनारे पर स्थित है पौराणिक कथाओं के अनुसार यह वही स्थान है, जहां पर गयासुर नाम के राक्षस को भगवान विष्णु द्वारा अपने दाहिने पैर से धरती के नीचे धक्का दे दिया गया था।
  • यहां पर भगवान विष्णु के पैरों के निशान छप गए थे, और फिर इसी के पश्चात भगवान विष्णु के दाहिने पैर के निशान पर ही एक मंदिर की स्थापना की गई और इस मंदिर की स्थापना इंदौर के एक शासक ने करवाई थी। यहां पर विष्णु जी के 40 सेंटीमीटर लंबे दाहिने पैर के निशान है। इसीलिए इस स्थान पर भी तीर्थयात्री भारत के कोने-कोने से आते हैं और भगवान विष्णु के दर्शन करते हैं इस मंदिर को लेकर लोगों के मन में यह धारणा भी हैं, कि हिंदू धर्म के व्यक्ति अगर अपनी पूरी जिंदगी में सिर्फ एक बार भी यहां पर आ जाते हैं, तो वह मृत्यु के पश्चात भगवान विष्णु के चरणों में स्थान प्राप्त करते हैं।

4. दुंगेशवरी गुफा मंदिर ( Dungeshwari Cave Temple )

बिहार के बोधगया शहर में यह खूबसूरत दुंगेशवरी गुफा मंदिर भी स्थित है इस स्थान को महाकाला गुफाओं के नाम से भी जाना जाता है, यह एक बहुत ही पवित्र स्थान है तथा इस स्थान पर पर्यटक पूरी दुनिया भर से शांति की तलाश में आते हैं और आपको नहीं पता तो हम बता दें कि यह वही स्थान है, जहां पर बोधगया मैं ज्ञान की प्राप्ति के लिए महात्मा गौतम बुद्ध ने घोर तपस्या की थी यह स्थान मुख्य रूप से तीन गुफाओं से मिलकर बना हुआ है, जिसमें अनेकों हिंदू तथा बौद्ध तीर्थ स्थल है इस स्थान को देखना हर एक हिंदू धर्म के लोग के लिए एक सपने के समान हैं। इसीलिए भारत के कोने कोने से लोग Visiting Places In Bodh Gaya में आते हैं, और यहां पर धार्मिक स्थलों की सैर करते हैं बोधगया के सभी तीर्थ स्थल दुनिया भर में मशहूर हैं।

5. बोधिवृक्ष ( Bodhi tree )

  • महाबोधि मंदिर में स्थित बोधि वृक्ष को ही श्री महाबोधि वृक्ष भी कहा जाता है, यह वृक्ष एक बहुत ही पवित्र माना जाता है। क्योंकि बौद्ध ग्रंथों के अनुसार इसी वृक्ष के नीचे बैठकर महात्मा बुद्ध नें ज्ञान की प्राप्ति की थी आपको जानकर हैरानी होगी, कि महात्मा बुद्ध ने जब इस वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या की तो फिर उसके पश्चात इस वृक्ष को बहुत से राजाओं ने नष्ट करने की कोशिश की परंतु ऐसा माना जाता है, कि इस वृक्ष को नष्ट तो कर दिया जाता था परंतु यह वृक्ष कुछ ही क्षण में फिर से वैसा का वैसा ही पनप जाता था।
  • इसीलिए इस वृक्ष को आज तक कोई भी शासक नष्ट नहीं कर पाया और इसी के कारण भारत के इतिहास में भी इस वृक्ष के बारे में जिक्र है, तथा इस वृक्ष को सबसे ज्यादा पवित्र वृक्ष भी माना जाता है यह वृक्ष लगभग 500 साल से भी काफी अधिक पुराना है, और आज भी यह वीक से लिखने में इतना ज्यादा सुंदर लगता है कि इस वृक्ष को देखकर लोगों को काफी शांति महसूस होती है, और ऐसा लगता है कि उनके मन मस्तिष्क से जैसे कोई भार कम हो गया हो।

Best Time To Visit In Bodh Gaya – बोधगया घूमने के लिए कौन सा मौसम ठीक रहता है?

हमने Places To Visit In Bodh Gaya तथा Bodh Gaya Tourist Places के बारे में तो अच्छे से जान ही लिया अब हम आपको यह बता देते हैं, कि इस मौसम में आप Visiting Places In Bodh Gaya

 पर घूमने के लिए आ सकते हैं। तो दोस्तों वैसे तो आप बोधगया शहर में घूमने के लिए अपनी मर्जी के अनुसार किसी भी मौसम में आ सकते हैं परंतु यदि आप अप्रैल से अक्टूबर तक के महीने में यहां पर आते हैं, तो उस समय यहां पर गर्मी का मौसम होता है और गर्मी में दोपहर के समय धूप में घूमना काफी कठिन हो जाता है। इसीलिए यदि आप नवंबर से मार्च के महीने में आते हैं तो घूमना थोड़ा आसान होता है, क्योंकि मौसम थोड़ा ठंडा होता है।

How To Reach In Bodh Gaya In Hindi – बोधगया कैसे पहुंचे?

यदि आप बोधगया घूमने के लिए आ रहे हैं तो आप यहां पर 3 रास्तों के माध्यम से पहुंच सकते हैं जैसे कि:-

1. By Train –

अगर आप रेलगाड़ी के माध्यम से यहां पर आना चाहते हैं। तो आप रेलगाड़ी में बैठ कर भी बोधगया शहर में ही आ सकते हैं बोधगया के सबसे नजदीक में Gaya Railway Station स्थित है  जो कि बोधगया से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, और इस रेलवे स्टेशन पर आप भारत के किसी भी राज्य से आसानी से आ सकते हैं।

2. By Air –

यदि आप बोधगया घूमने के लिए आ रहे हैं और अपना ज्यादा समय व्यर्थ नहीं करना चाहते, तो आप बोधगया हवाई मार्ग से भी आ सकते हैं मतलब कि आप हवाई जहाज में बैठकर भी बोधगया घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर सबसे नजदीक Gaya Airport है जो कि यहां से लगभग 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, और आप भारत के किसी भी राज्य से बोधगया एयरपोर्ट पर आसानी से हवाई जहाज के माध्यम से पहुंच सकते हैं।

3. By Road –

बोधगया तीर्थ स्थलों पर घूमने के लिए आप अपनी खुद की गाड़ी से भी आ सकते हैं या फिर आप बस के माध्यम से भी बोधगया आ सकते हैं। बोधगया शहर की सभी सड़कें बिहार के अन्य शहरों तथा भारत के अन्य राज्यों के साथ आपस में जुड़ी हुई हैं, जिसके माध्यम से आप बोधगया आसानी से आ सकते हैं।

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